Oct 28, 2018

राजा रानी की कहानी । King Queen Story in Hindi

यह एक राजा और रानी की कहानी है जिसमें आपको एक नारी की समझदारी और शक्ति का मूल्यांकन मिलेगा। यह कहानी एक राजा और रानी के प्यार और प्रेम के बारे में है जिसमें राजा रानी के प्यार और प्रेम नहीं होने के कारण होने वाले प्रभाव के बारे में बताया गया है। यह कहानी शारूफ खान द्वारा लिखी गई है। इस कहानी को केवल Inida Weblink ब्लॉग पर पब्लिश किया गया है। कहानी को पूरा पढ़िए और अगर आपको ऐसी कहानी और पढ़नी हैं तो हमें सूचित करें।

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एक समय की बात है कि एक बार एक राजा अपनी रानी के साथ महल के सामने वाले बगीचे में घूम रहा था। राजा और रानी में आपस में बहुत प्रेम था। रानी का नाम कामिनी और राजा का नाम चंदरसिंह था। चलते चलते राजा और रानी बगीचे के बीचो बीच पहुंच गए। राजा ने रानी को अपनी बाहों में लेना चाहा तभी अचानक वहां पर राजा का सिपाही आ गया। राजा बहुत क्रोधित हुआ और सिपाही से कड़क कर बोला कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहां पर आने की। सिपाही घबरा गया और उसने उत्तर दिया की महाराज हमारे महल पर कुछ दुश्मन चढ़ाई कर रहे हैं तथा आक्रमण होने की संभावना है।
राजा ने तुरंत अपने सेनापति व सिपाहियों को इकट्ठा किया और युद्ध के लिए तैयार होने को कहा। सभी सिपाहियों ने अपने सस्त्र और तलवार उठा लिए और जंग के लिए तैयार हो गए। जब राजा और सिपाही मैदान में पहुंचे तो सामने उसने देखा कि उसकी दूसरी रानी वैशाली ने बगावत की है और उसने कुछ सैनिकों को अपनी तरफ कर लिया है तथा वह युद्ध करना चाहती है। इस दृश्य को देखकर राजा आग बबूला हो गया और उसने उस दुश्मन रानी को सबक सिखाने की मन में ठान ली।

वैशाली रानी राजा से खुश नहीं थी क्योंकि राजा हमेशा रानी कामिनी को ही ज्यादा महत्व देता था। राजा ज्यादातर समय रानी कामिनी को ही देता था। रानी वैशाली के दुश्मन होने और बगावत करने की असली वजह थीं। राजा बहुत गर्म स्वभाव का था इस कारण उसने एक बार भी रानी वैशाली से यह तक नहीं पूछा की तुम्हारे युद्ध करने का कारण क्या है। राजा ने भी अपने सेनापति को आदेश दे दिया की इस पर आक्रमण किया जाए। युद्ध शुरू हो गया तथा भयंकर युद्ध होने लगा। वैशाली रानी भी एक कुशल योद्धा थी वह हर कब मानने वाली थी, उसने भी अपने आप को पूरी तरह से तलवार को समर्पित कर दिया था। 
रानी कामनी युद्ध के समय महल में थी उसको भी किसी सैनिक के माध्यम से सूचना मिली कि रानी वैशाली ने राजा के खिलाफ जंग छेड़ दी है। रानी कामिनी बहुत दुखी हुई और वह नहीं चाहती थी कि राजा और रानी के आपसी बिगाड़ के कारण प्रजा को हानि हो। वह इस बात को सोच कर बहुत परेशान होने लगी कि जंग में मारे गए सैनिकों के कितने बच्चे अनाथ हो जाएंगे। इसलिए रानी कामिनी ने एक योजना बनाई और किसी के हाथ राजा को संदेश भेजा कि मैं महल छोड़ कर जा रही हूं।

उधर युद्ध जारी था अभी किसी की भी हार और जीत का फैसला नहीं हुआ था। रानी वैशाली ने बहुत बहादुरी से युद्ध लड़ा और राजा के करीब पहुंच गई। राजा भी रानी से युद्ध करने लगा तथा रानी के तेज वार से राजा की तलवार टूट गई। रानी ने राजा को बंदी बना लिया तभी रानी का संदेश लेकर एक सिपाही राजा के पास आ गया। सिपाही ने राजा को संदेश सुनाया की रानी कामनी महल छोड़ कर जा रही हैं। राजा दोनों रानियों के इस व्यवहार से बहुत दुखी हो गया। रानी वैशाली ने जब यह संदेश सुना तो उसने राजा को छोड़ दिया क्योंकि वह जैसा चाहती थी वैसा रानी कामिनी ने कर दिया। वह चाहती थी कि किसी भी तरह रानी कामिनी से राजा की दूरी बने।
राजा रानी कामिनी से बहुत प्रेम करता था इसलिए उसके महल छोड़ने की खबर से तुरंत महल पहुंचा तो देखा रानी महल छोड़ कर नहीं गई थी। राजा ने पूछा यह क्या मजाक है तुमने मुझे यह संदेश भेजा था। रानी ने कहा हां मैंने है यह संदेश भेजा था। राजा ने इसका कारण पूछा तो रानी कामनी ने कहा कि एक सभा बुलाई जाए और उसमे रानी वैशाली को भी बुलाया जाए। राजा ने एक सभा बुलाई और रानी वैशाली को भी उसमें आने के लिए आमंत्रित किया। जब सभा में सभी आ गए तो राजा ने रानी कामिनी को आदेश दिया कि अपनी बात पूरी की जाए। रानी कामिनी ने अपनी बात की और कहा कि रानी वैशाली का महाराज से युद्ध करना बहुत दुखद है।

लेकिन यह इस बात की दलील है किरानी वैशाली महाराज से बहुत प्रेम करती हैं। क्योंकि अक्सर जब व्यक्ति किसी को चाहने लगता है तो उसको पाने के लिए बहुत बड़े कदम उठा लेता है। रानी कामिनी ने कहा कि कि महाराज आपने रानी वैशाली को उसके पत्नी होने का हक नहीं दिया इसलिए वह आपसे युद्ध करने पर उतारू हुई तो यह आपके और रानी वैशाली के बीच प्यार प्रेम नहीं होने का परिणाम है। अगर प्यार प्रेम के कारण लोगों की जान जाती है और प्रजा को नुकसान पहुंचता है तो यह बहुत निंदनीय होगा। राजा को रानी कामिनी की बात समझ आ गई और उसने कहा कि अब से में रानी वैशाली और रानी कामिनी में कोई फर्क नहीं करूंगा। जितना मैं रानी कामिनी को महत्व दूंगा उतना ही रानी वैशाली को महत्व दूंगा।
उम्मीद करते हैं कि आपको यह कहानी पसंद आई होगी यह राजा रानी की कहानी है इसमें एक राजा और रानी के प्यार और प्रेम को दर्शाया गया है। दूसरी तरफ इस कहानी में रानी कामिनी की समझदारी और बहुत ऊंची सोच को प्रदर्शित किया गया है। अगर कहानी पसंद आई हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और कमेंट करके भी जरूर बताएं।
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